श्री दादूदयाल वाणी साभार विद्युत संस्करण स्मरण का अंग – २

21 Aug
2017

“श्री दादूदयाल वाणी(आत्म-दर्शन)”
टीका ~ महामण्डलेश्वर ब्रह्मनिष्ठ पंडित श्री स्वामी भूरादास जी
साभार विद्युत संस्करण ~ गुरुवर्य महामंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमाराम जी महाराज

= स्मरण का अंग – २ =

छिन – छिन राम संभालतां, जे जीव जाइ तो जाय ।
आतम के आधार को, नाहीं आन उपाय ॥ ११ ॥

इसलिए हे जिज्ञासुओ ! “स्वासैं स्वास”, नाम स्मरण करते हुए यदि प्राण चले जावे तो अति उत्तम है, क्योंकि राम के स्मरण के अतिरिक्त आत्मा के उद्धार का कोई भी उपाय नहीं है ।

स्मरण माहात्म्य

एक मुहुर्त मन रहै, नांव निरंजन पास ।
दादू तब ही देखतां, सकल कर्म का नास ॥ १२ ॥

टीका – यदि एक क्षण भर भी परमात्मा के नाम से निष्काम वृत्ति से यह मन एकाग्र हो जावे, तो उसी क्षण पूर्व संचित सकाम कर्मों का क्षय हो जाता है ।
(क्रमशः)




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